Thursday, 16 January 2014
Monday, 21 October 2013
Kemadruma Yoga (Hindu astrology)-केमद्रुम योग ज्योतिष
जन्म
कुण्डली में चन्द्रमा से
बारहवें तथा दूसरे भाव
में यदि एक
भी ग्रह न हो तो उसे
केमद्रुम योग कहते हैं
इस प्रकार की
जब स्थिति जब
कुण्डली में बनती है तो
जातक से लक्ष्मी का
वियोग होता है
.
कुण्डली में
यदि चन्द्रमा को
सम्पूर्ण ग्रह देख रहो
हों तो केमद्रुम योग
को भंग कर
जातक को सम्पूर्ण सुख
की प्राप्ति होती
है और जातक
चिरंजीवी रहता है .
चन्द्रमा से
यदि केन्द्र [1-4-7-10] भाव में
यदि सब ग्रह
स्थित हों तो
केमद्रुम योग को नष्ट
कर जातक को
श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती
है इसी प्रकार
जन्मकुंडली में यदि जातक
की मेष राशि
हो और मंगल
और गुरु तुला
राशि में स्थित
हों और सूर्य
कन्या राशिगत हो
तो व्यक्ति को
राजयोग का फल
मिलना संभव रहता
है
शुभम भूयात
Acharya Vipin Krishna
Jyotishi, Vedpathi & Katha Vachak
West Vinod Nagar Delhi
Mobile- 09015256658, 09968322014
Friday, 4 October 2013
Navratri Durga Puja- आश्विन नवरात्रि -२०१३ (५ अक्टूबर-१३ अक्टूबर )
आश्विन नवरात्रि -२०१३ (५ अक्टूबर-१३ अक्टूबर )
पराम्बा भगवती महामाया की उपासना का पर्व है नवरात्रि .
नवानां रात्रीणाम् समाहार:--नवरात्रम्
नौ रात्रियों के सम्मिश्रण का नाम है नवरात्र .
इन नौ दिनों में भगवती के नौ स्वरूपों की पूजा का विधान है और जो इन नव दिनों में भगवती की उपासना करता है तो माँ कहती है --सानिध्यं तत्र स्तिथि:--में सदैव उनके साथ रहती हूँ और उनके घर में किसी वास्तु का आभाव नहीं रहता और माँ की कृपा बनि रहती है .
भगवती दुर्गा भक्ति और शक्ति का प्रतीक है .स्वयं भगवान राम ने आश्विन मास में रावण वध के समय नवरात्रि पूजन किया था .
जब सीता का हरण हुआ तो किस्किन्धा पर्वत पर राम जी से नारद जी की भेट हुई .नारद जी ने कहा -कि राम जी -में जनता हूँ रावण ने सीता का हरण किया है लेकिन उस महावली रावण को मारने के लिये आपको शक्ति की उपासना करनी चाहिए -
श्रृणु राम सदा नित्या शक्ति राध्या सनातनी .
सर्व काम प्रदा देवी पूजिता दु:ख नाशनी .
तब नारद जी के कहने पर राम जी ने नवरात्रि पूजन किया और पूजन का ऐसा प्रभाव रहा कि अष्टमी की रात्रि को माँ प्रकट हुई और तब माँ ने कहा -
राम -राम महाबाहो तुष्टास्म्यद्ध व्रतेन ते
प्रार्थयस्व वरं कामं यत्ते मनसि वर्तते .
माँ ने कहा कि आपका अवतरण रावण वध के लिये हुआ है इसलिए आपके वाणों में मेरी शक्ति निहित रहेगी जिससे तुम रावण का वध करोगे .
भगवती की शक्ति मिली ,नौमी को यज्ञ पूर्ण हुआ और दशमी के दिन जाकर रावण का संहार किया -इसलिए इसे विजयादशमी भी कहते हैं ..
पराम्बा भगवती महामाया की उपासना का पर्व है नवरात्रि .
नवानां रात्रीणाम् समाहार:--नवरात्रम्
नौ रात्रियों के सम्मिश्रण का नाम है नवरात्र .
इन नौ दिनों में भगवती के नौ स्वरूपों की पूजा का विधान है और जो इन नव दिनों में भगवती की उपासना करता है तो माँ कहती है --सानिध्यं तत्र स्तिथि:--में सदैव उनके साथ रहती हूँ और उनके घर में किसी वास्तु का आभाव नहीं रहता और माँ की कृपा बनि रहती है .
भगवती दुर्गा भक्ति और शक्ति का प्रतीक है .स्वयं भगवान राम ने आश्विन मास में रावण वध के समय नवरात्रि पूजन किया था .
जब सीता का हरण हुआ तो किस्किन्धा पर्वत पर राम जी से नारद जी की भेट हुई .नारद जी ने कहा -कि राम जी -में जनता हूँ रावण ने सीता का हरण किया है लेकिन उस महावली रावण को मारने के लिये आपको शक्ति की उपासना करनी चाहिए -
श्रृणु राम सदा नित्या शक्ति राध्या सनातनी .
सर्व काम प्रदा देवी पूजिता दु:ख नाशनी .
तब नारद जी के कहने पर राम जी ने नवरात्रि पूजन किया और पूजन का ऐसा प्रभाव रहा कि अष्टमी की रात्रि को माँ प्रकट हुई और तब माँ ने कहा -
राम -राम महाबाहो तुष्टास्म्यद्ध व्रतेन ते
प्रार्थयस्व वरं कामं यत्ते मनसि वर्तते .
माँ ने कहा कि आपका अवतरण रावण वध के लिये हुआ है इसलिए आपके वाणों में मेरी शक्ति निहित रहेगी जिससे तुम रावण का वध करोगे .
भगवती की शक्ति मिली ,नौमी को यज्ञ पूर्ण हुआ और दशमी के दिन जाकर रावण का संहार किया -इसलिए इसे विजयादशमी भी कहते हैं ..
Tuesday, 20 August 2013
Jyotish Falit-ग्रहों की अवस्थायें एवं उनका फल
ग्रह
अपने निरंतर भ्रमण में विभिन्न स्थितियों में पहुचते है और यही स्थितियां ग्रहों की अवस्थायें कहलाती हैं.प्रत्येक अवस्था का अपना-अपना फल होता है और कुण्डली विश्लेषण के समय ज्योतिषी को इन अवस्थाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए .
१-दीप्तावस्था
२-स्वस्थ अवस्था
३-मुदित अवस्था
४-शांत अवस्था
५-शक्त अवस्था
६-पीड़ित अवस्था
७-दीन अवस्था
८-विकल अवस्था
९-भीत अवस्था
१०-खल अवस्था
१-दीप्तावस्था ---जब ग्रह अपनी उच्च राशि में रहता है तो वह दीप्त होता है इस स्थिति में जातक को धन लाभ ,अपने से बड़ों से सम्मान प्राप्त होना,ख्याति मिलना और संतान सुख मिलना ये फल मिलते देखे गए है .
२-स्वस्थ अवस्था ---जब ग्रह अपनी ही राशि में भ्रमण करता है तो वह ग्रह की स्वस्थ अवस्था कहलाती है इस स्थिति में जातक को पूर्ण सम्मान व् उच्च पद मिलना ये देखे गए है .
३-मुदित अवस्था -----ग्रह मुदित तब होता है जब वह अपने मित्र ग्रह की राशि में भ्रमण करता है .
४-शांत अवस्था --यदि कोई ग्रह शुभ वर्ग में हो अर्थात नवांश आदि कुंडलियो में शुभ हो तो वह ग्रह की शांत अवस्था कहलाती है ऐसा ग्रह शुभ फलदायी होता है .
५-शक्त अवस्था ---ग्रह जब पूर्ण विम्ब वाला ,उदित रहता है तो वह ग्रह की शक्त अवस्था कहलाती है .
६-पीड़ित अवस्था ---जब ग्रह कुण्डली में कमजोर हो ,बलहीन हो, कम किरणों वाला हो तो वह ग्रह पीड़ित कहलाता है .
७-दीन अवस्था ---जब ग्रह कुण्डली में अपने नैसर्गिक शत्रु की राशि में रहता है तो वह ग्रह की दीन अवस्था कहलाती है .
८-विकल अवस्था ---जब कोई ग्रह कुण्डली में सूर्य की किरणों से अस्त हो तो वह ग्रह की विकल अवस्था कहलाती है और ग्रह अशुभ फल प्रदान करता है .
९-भीत अवस्था ---जब कोई ग्रह अपनी नीच राशि में भ्रमण करता है तो वह ग्रह की भीत अवस्था कहलाती है
१०-खल अवस्था --जब कोई ग्रह पाप ग्रहों के वर्ग में रहता है तो ग्रह खल होता है अर्थात होरा द्रेष्काण आदि वर्गों में ग्रह पाप ग्रह की राशि में रहता है तो वह खल अवस्था में होता है .ऐसे ग्रह धन हानि करते है और कभी -कभी तो कोर्ट कचहरी तक भी पंहुचा देते है ऐसे फल देखने में आये है.
शुभम
भूयात
Jyotishi, Vedpathi & Katha Vachak
Mobile- 09015256658, 09968322014
Saturday, 17 August 2013
Jyotish-ज्योतिष ज्ञान
जय बद्री विशाल ,
अप्रत्याक्षाणि शास्त्राणि विवादस्तत्र केवलं
प्रत्यक्षं ज्योतिषं शास्त्रं चंद्रार्को यत्र साक्षिनों.
अनादि काल से मानव अज्ञात एवं अगोचर को जानने के लिये संवेदनशील एवं जिज्ञासू रहा है मानव की इसी जिज्ञासा प्रवृत्ति के कारण चिंतनशील प्रबुद्ध मनीषियों ने अपने परिवेश से सहस्रों मील दूर संचरणशील ग्रह नक्षत्र एवं ताराओं के स्वरुप एवं उनके पारस्परिक प्रभावों का गहन निरीक्षण .अध्ययन एवं चिंतन प्रारंभ किया .मानव जीवन को सुव्यवस्थित रूप प्रदान करने के लिये ऋषियों ने अध्यात्म एवं वैदिक ज्ञान ,दर्शन शास्त्र ,संगीत ,आयुर्वेद ,ज्योतिष आदि शास्त्रों का प्रणयन किया .
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जातक के जन्म समय सौर-मंडल एवं जन्म कुण्डली में जिस प्रकार के ग्रहों की स्तिथि होती है उसी के अनुसार मनुष्य का जीवन प्रभावित होता रहता है .
ग्रहाधीनं जगत्सर्वं ग्रहाधीना नरावरा:
सृष्टि रक्षण संहारा: सर्वे चापि ग्रहानुगा:.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों के द्वारा निर्मित योगो का शुभ और अशुभ किस तरह मिलेगा इसका संक्षिप्त वर्णन देखिये .
१-जन्म कुण्डली में लग्न व् सप्तम भाव में सब ग्रह जब स्थित होते है तब शकट योग बनता है .इस योग का मनुष्य गाड़ी भाड़े से चलाकर अपनी आजीविका साध्य करता है किन्तु रोगी रहता है और पत्नी मानी ,विपरीत स्वभाव कृष् एवं कृपण होती है .
२-जन्म कुण्डली में चन्द्रमा से १२ वें व् दूसरे भाव में यदि एक भी ग्रह न हो तो उसे केमद्रुम योग कहते है ऐसे योग वाले व्यक्ति से लक्ष्मी का सदैव वियोग बना रहता है जो उसे निर्धन बनाता है .
३-जन्म कुण्डली में सूर्य और चन्द्रमा की युति हो अथवा दृष्ट हो तो व्यक्ति कार्यकुशल होता है लेकिन अल्प कपटपन रहता है .
४-जन्म कुण्डली में सूर्य-मंगल की युति हो अथवा दृष्ट हो तो व्यक्ति पुरुषार्थी ,शीघ्र क्रोधी ,साहसी रहता है .
५-जन्म कुण्डली में सूर्य और गुरु का योग हो तो व्यक्ति संपन्न ,चतुर होता है .
शुभम भूयात
पंडित विपिन कृष्ण शास्त्री
ज्योतिषी, वेद पाठी एवं कथा वाचक
Pandit Vipin Krishna Shastri
Jyotishi, Ved Pathi Avam Katha Vaachak
Pandit Vipin Krishna Shastri
Jyotishi, Ved Pathi Avam Katha Vaachak
Jyotish, Jyotish Pandit, Janm Kundali, Falit Jyotish, Jyotish Guru
Thursday, 8 August 2013
Shani Sade Sati-शनि ग्रह की साढ़ेसाती
शनि ग्रह प्रत्येक राशि में ढाई वर्ष भ्रमण करने पर अगली राशि में प्रवेश करता है इस तरह जन्म राशि के द्वादश भाव में जिस दिन शनि प्रवेश करता है उसी दिन से शनि की साढ़ेसाती प्रारंभ हो जाती है .उस राशि का भ्रमण ढाई वर्ष पूर्ण करके जन्म कुण्डली में चन्द्रमा जिस राशि में है उस राशि में प्रवेश करने पर दूसरा ढाई वर्ष और उससे अगली राशि में जब प्रवेश करे उसके ढाई वर्ष के गति से साढ़ेसात वर्ष का भ्रमण -इसी को साढ़ेसाती कहते हैं.
प्रत्येक राशि में शनि ढाई वर्ष की गति से बारह राशि का भ्रमण ३० वर्ष में पूरा करता है
जन्म कुण्डली में शनि यदि अशुभ फलदाई हो और अपने साढ़ेसाती के काल में अशुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो या जन्म गौचर ग्रह हो तो शनि मनुष्य को भयानक अशुभ फल देता है जिसका उसे आजन्म विस्मरण होना असंभव है.भले ही वह नास्तिक मत का क्यों न हो परन्तु शनि की साढ़ेसाती आरम्भ होते ही अपने शुभ या अशुभ फल से उसके परिस्थिति में परिवर्तन निर्माण करता है और अन्त में वह विश्वास करने के लिए वाध्य होता है .
और यदि कुण्डली में शनि शुभ हो तो वह अपने साढ़ेसाती के काल में निर्धन को धनी भी बनाकर पर्वत के शिखर पर बैठते हैं ऐसे कई उदाहरण है .
समस्त ग्रहों में शनि ग्रह इतना प्रबल शक्तिशाली है कि वह अपने शुभ-अशुभ का परिचय व् प्रत्यक्ष प्रमाण मानवीय प्राणी को ही नहीं अपितु ईश्वरीय विभूति ,महर्षि देवता व् राजाओं को भी दिखाया है .
शनि की साढ़ेसाती के काल में भगवान राम को वनवास करना पड़ा .परम विद्वान ज्योतिषी रावण को सीताहरण की दुर्बुद्धि देकर यमयातना भोगने को बाध्य किया .भगवान श्री कृष्ण को स्यमन्तक मणि का कलंक लगाया .पांडवो को वनवास दिया ,भगवान शंकर को छणभर के लिए कैलाश में छिपने के लिए बाध्य किया ऐसे अनेक उदाहरण हैं .
शनि ग्रह अपना अशुभ फल दिखाने के पूर्व ही शूरों की शूरता ,बीरों की बीरता ,अधिकारियों की सत्ता ,विद्वानों की बुद्धिमता ,धनिको का धन सब कुछ हरण कर मनुष्य को विचार शून्य कर देता है .
इसके विपरीत यदि जन्म कुण्डली में शनि शुभफलदाई है तो शनि अपने साढ़ेसाती के काल में मनुष्य को सुख व् ऐश्वर्य के शिखर पर चढा कर श्रेष्ठ बना देता है .
शुभम भूयात
Acharya Vipin Krishna
Jyotishi, Vedpathi & Katha Vachak
West Vinod Nagar Delhi
Mobile- 09015256658, 09968322014
Raksha Bandhan 2013 - रक्षाबंधन
इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा दो दिन व्याप्त है 20 अगस्त मंगलवार को प्रात:10:22 से आगामी दिन 21 अगस्त को प्रात: 7:15 तक रहेगी लेकिन 20 अगस्त को भद्रा भी प्रात: 10:22 से रात्रि 20:49 तक रहेगी .
--
धर्म सिंधु के अनुसार -
रक्षावन्धनमस्यामेव पूर्णिमायां भद्रा रहितायां त्रिमुहुर्ताधिकोदय व्यापिनी अपराह्ने प्रदोषे वा कार्यम.
शास्त्र के अनुसार 20 अगस्त मंगलवार को भद्रा रहित काल में रात्रि 20:49 के बाद रक्षावन्धन पर्व मनाया जा सकता है
लेकिन अधिकांशत: भाई बहिन पूजा पाठ नित्यकर्मो से निवृत होकर निराहार रहकर शुद्ध मुख सहित मन्त्र पूर्वक रक्षा वन्धन करते हैं इसलिए अधिकांशत: प्रदेशो में 21 अगस्त बुधवार को भद्रा रहित काल में उदय कालिक पूर्णिमा तिथि में रक्षावन्धन का पावन कृत्य संपादित किया जाएगा .
शुभम भूयात
Thanks & Regards
Acharya Vipin Krishna
Jyotishi, Vedpathi & Katha Vachak
West Vinod Nagar Delhi
Mobile- 09015256658, 09968322014





